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Chhattisgarh Festival Puspuni Happy ChherChhera photos, wishes, SMS, Messages 2020

Chhattisgarh Festival Puspuni Happy ChherChhera photos, wishes, SMS, Messages - पुसपुनी का त्योहार छत्तीसगढ़ का एक प्रचलित त्यौहार है जिसे छेर छेरा (Chher Chhera) त्यौहार के नाम से भी जाना जाता है । छत्तीसगढ़ एक कृषि प्रधान राज्य है और यहां के अधिकतर लोग कृषि करते हैं । (The Puspuni or Chherchhera ( Chher Chhera ) is a popular festival of chhattisgarh.)

छेड़छेरा त्यौहार को मानने से संबंधित बहुत सी मान्यताएं हैं ऐसा माना जाता है कि भगवान राजा बलि की परीक्षा लेने के लिए वामन अवतार में राजा बलि के पास गए । राजा बलि अपनी दान के लिए जाने जाते थे इसलिए भगवान उनकी परीक्षा लेने के लिए अपना रूप बदलकर गए ।


यह त्यौहार कृषि प्रधान त्यौहार है जो हर वर्ष पौष मास के पूर्णिमा को मनाया जाता है । 2020 में छेरछेरा का त्योहार 10 जनवरी को है । इस दिन बच्चे घर घर जाकर छैरछेरा (chherchhera) मांगते हैं । छेरछैरा ऐसे ही नहीं बल्कि स्लोगन गाकर मांगा जाता है । इसके अलावा डंडा नृत्य भी गाया जाता है । इस डंडा नृत्य में लोग लोकगीत गाकर डंडा नृत्य करते हैं । Chherchhera का त्यौहार धान की फसल के घर तक पहुंचने अर्थात कटाई और मिसाई का काम होने के बाद किया जाता है । इस दिन लक्ष्मी माता की पूजा भी की जाती है ।

Chherchhera के दिन बच्चे chher Chhera चिल्लाते हुए घर घर जाते हैं ।


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छेर छेरा
कोठी के धान ल हेर हेरा
जम्मो संगवारी मन ला छेर छेरा तिहार के बधाई


















Happy Chherchhera









छेर छेरा का त्योहार छत्तीसगढ़ में बड़े धूम धाम से मनाया जाता है । इस दिन बच्चे घर घर जाते हैं और   ‘छेर छेरा ! माई कोठी के धान ला हेर हेरा !’ कहकर चिल्लाते है । घर के लोग इन बच्चों को प्यार से धान देते हैं ।

छेर छेरा त्योहार को मनाने से संबंधित बहुत सी कथाएं प्रचलित है जिसमें इस कथा को ज्यादा मान्यता दी जाती है -

एक समय की बात है जब कोशलाधिपति कल्याण साय जी दिल्ली के महाराज के राज्य में राजपाठ, युद्ध विद्या की शिक्षा ग्रहण कन्ने के लिए ८ वर्षो तक रहे. ८ वर्ष बाद जब शिक्षा समाप्त हो गई हो वे सरयू नदी के किनारे किनारे होते हुए ब्राम्हणो के साथ छत्तीसगढ़ के प्राचीन राजधानी रतनपुर वापस पहुंचे ।


 जिसकी जानकारी जब ३६ गढ़ के  प्रजा को हुई तो तो उनके स्वागत के लिए सभी रतनपुर पहुचने लगे और राजा के वापस लौटने की ख़ुशी में नाचने गाने लगे. जब राजा महल पहुंचे तो रानी ने उनका स्वागत किया और महल के छत के ऊपर से अपनी प्रजा को दान के रूप में अन्न, धन और सोने चांदी बाटी। जिसके बाद प्रजा में ने उन्हें आशीर्वाद देते हुए राज महल का  खजाना और अन्नागार सदा भरे रहने का आशीर्वाद दिया। जिसके बाद राजा कल्याण से ने पौष पूर्णिमा के दिन छेरछेरा त्यौहार हमेशा मनाने का फरमान जारी किया।
 तब से लेकर आज तक पौष पूर्णिमा के दिन छत्तीसगढ़ के लोग छेरछेरा त्यौहार मानते है ।

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