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Mission Chandrayaan 2 क्या है और इसके साथ क्या हुआ


चंद्रयान 2 - चंद्रमा, पृथ्वी का एक प्राकृतिक उपग्रह है । विश्व के वैज्ञानिक हमेशा से ही कुछ ना कुछ जानने के लिए उत्सुक रहते हैं । इनकी खोज ना केवल पृथ्वी तक सीमित है बल्कि इसके बाहर उपस्थित चीजों के बारे में जानने के लिए उत्सुक हैं । विश्व के सभी वैज्ञानिक, हमारे धरती के बाहर भी जीवन की कल्पना के साथ निरंतर खोज कर रहे हैं ।

अगर अंतरिक्ष से संबंधित विज्ञान (science) की बात आती है तब अमेरिका, रूस, चीन जैसे देशों का नाम आता है क्योंकि वहां की तकनीक ज्यादा डेवलप्ड है बाकी देशों की तुलना में । भारत एक विकासशील देश है और अनुसंधान की दौड़ में वो पहले से ही था भले ही बात अंतरिक्ष कि ही क्यों ना हो । भारत में अंतरिक्ष विज्ञान का विकास बहुत पहले से हो गया था और यह निरन्तर प्रगतिशील है । भारत ने अपनी स्वदेशी तकनीक से कई सेटेलाइट विकसित कि है और अब अपनी स्वदेशी तकनीक के बदौलत चांद तक पहुंचने का स्वप्न देखा है यही है mission chandrayaan 2 ।

Mission chandrayaan 2 का मकसद केवल चांद तक पहुंचना ना होकर, वहां अपनी रोबोटिक मशीन उतारकर वहां के वातावरण एवं मिट्टी के नमूने की जांच करना और रिपोर्ट भेजना भी है । इसी मकसद से भारत के अंतरिक्ष अनुसंधान केन्द्र ISRO ने chandrayaan 2 mission लाया था ।


Mission Chandrayaan 2 क्या है ?

22 जुलाई 2019 को भारत के अंतरिक्ष अनुसंधान केन्द्र ISRO ने अपना स्वदेशी तकनीक द्वारा निर्मित चंद्रयान 2 लॉन्च किया । यह यान पूर्ण रूप से भारत में बनी थी और इसपर करीब 978 करोड़ रुपए लगाया गया था । जिसका उद्देश्य चंद्रमा के वातावरण को अच्छे समझना था । इस चंद्रमा मिशन की शुरुवात 22 अक्टूबर 2008 में प्रारंभ हुआ था तब ISRO द्वारा चंद्रयान 1 लॉन्च किया गया था ।
इस बार की चंद्रयान 2 कुछ ज्यादा खास थी क्योंकि इस मिशन के तहत लैंडर को चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करना था । वहां के वातावरण का बिना सटीक जानकारी के यह कर पाना बहुत ही कठिन काम है । यह लैंडिंग चंद्रमा के साउथ पोल पर होने वाली थी । वैज्ञानिकों का सारा ध्यान इस मिशन पर था पर जिस दिन सॉफ्ट लैंडिंग होने वाली थी उस दिन लैंडर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला ही था कि विक्रम लैंडर का संपर्क चंद्रमा सतह से करीबन 2.1 किलोमीटर की दूरी पर टूट गया । लाखों लोग इसे लाइव देख रहे थे । ISRO के अध्यक्ष शिवन ने कुछ समय बाद बताया की हमारा विक्रम लैंडर से संपर्क नहीं हो पा रहा है, चंद्रमा सतह से करीबन 2.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर हमारा संपर्क टूट गया ।

मिशन लगभग 98% तक सफल हो गई थी । यह इस मिशन का अंत नहीं है अभी भी कुछ दिनों तक संपर्क साधने का प्रयास किया जा रहा है । NASA भी भारत की इस घटना को जानने के बाद मदद करने के लिए हाथ बढ़ाया और संपर्क साधने में मदद करने लगा । चंद्रमा में अपना यान उतारना उतना आसान भी नहीं है क्योंकि वहां 14 दिन और 14 रात होती है जिसमें तापमान बहुत अधिक बढ़ जाती है और रात में तापमान बहुत गिर जाती है ।

लगातार प्रयास किया जा रहा है कि संपर्क टूटने का कारण को पा सकें और दोबारा से संपर्क किया जा सके । यह मिशन ISRO के चंद्रयान 2 का अंत नहीं है । 2020 के लिए भी खास प्लांनिंग किया जा रहा है ।

चंद्रयान 2 के साथ क्या हुआ ?

विक्रम लैंडर के चंद्रमा सतह में सॉफ्ट लैंडिंग करते वक्त करीबन 2.1 किलोमीटर ऊपर विक्रम लैंडर का संपर्क टूट गया । संपर्क टूटने की वजह का पता लगाया जा रहा है और निरंतर दोबारा से लैंडर से संपर्क साधने का प्रयास किया जा रहा है । यह मिशन 98% तक सफल रहा ।

चंद्रयान 2 से संबंधित latest news update

> आंकड़ों के जांच से पता चला है कि चंद्रयान 2 का संपर्क चंद्रमा की सतह से 2.1 किलोमीटर दूरी पर ना टूटकर करीबन 300 मीटर दूरी पर टूटी थी । यह खबर मीडिया के हवाले से पता चली है ।
> संपर्क साधने में NASA भी ISRO की मदद कर रहा है ।

Conclusion

यह भारत का एक महत्वपूर्ण मिशन था और इस स्थिति में सभी भारतवासियों को हतास होने की वजह हमारे वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित करना चाहिए जिससे अगली बार चंद्रयान मिशन सफल हो सके । यह भी कोई असफलता नहीं है, हमारा मिशन लगभग 98% सफल रहा और इस मिशन की खास बात यह है कि इस मिशन में लगभग आधी वैज्ञानिक महिलाएं थी । यह महिलाओं को भी निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्सहित करती है । हमारे देश के प्रधनमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने भाई हमारे देश के वैज्ञानिकों का हौसला बढ़ाया ।
जय हिन्द 🙏